रुलाऊंगा मैं तुमको आंसू खुशी के,
गमों को दबाए जो तुम हंस रहे हो.
न परवा करो बेदरदे जहां की,
जिसके चलन में तुम फंस रहे हो.
छोड़ो गुलामी फर्जों उसूलों की,
तले बोझ जिनके तुम बस रहे हो.
पिला न सकेगा ज़हर कोई तुमको,
खुद ही मुकद्दर को क्यों डस रहे हो
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नामुराद
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