प्रभु जी, सुनियो
अरज हमारी
दुनिया की इस भरी
सभा में
रखियो लाज हमारी
सुनियो अरज
हमारी, प्रभु जी
पाप के मंदिर निश
दिन बनते
झूठ की गंगा बहती
धर्म की ऑंखें
अंधी हो गयीं
पूजा हो गई सच्ची
सुनियो अरज हमारी,
प्रभु जी
तोड़ दिया अंधे
हाथों ने
राम नाम का
प्याला
जल के रख हुई रे
कान्हा
भक्तों की
मधुशाला
सुनियो अरज हमारी
प्रभु जी,
इस मन में तुम
बसे हुए हो
जाने ये संसारी
आस मिलन की जनम
जनम तक
फिर भी रहे
कुंवारी
सुनियो अरज हमारी
प्रभु जी, सुनियो
अरज हमारी........................
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