Friday, June 24, 2011

जब मैं छोटा था ......


जब मैं छोटा था, शायद दुनिया

बहुत बड़ी हुआ करती थी..
मुझे याद है मेरे घर से "स्कूल" तक

का वो रास्ता, क्या क्या नहीं था वहां,

चाट के ठेले, जलेबी की दुकान,

बर्फ के गोले, सब कुछ,
अब वहां "मोबाइल शॉप",

"विडियो पार्लर" हैं,

फिर भी सब सूना है..
शायद अब दुनिया सिमट रही है...

जब मैं छोटा था,

शायद शामें बहुत लम्बी हुआ करती थीं...

मैं हाथ में पतंग की डोर पकड़े,

घंटों उड़ा करता था,

वो लम्बी "साइकिल रेस",
वो बचपन के खेल,

वो हर शाम थक के चूर हो जाना,
अब शाम नहीं होती, दिन ढलता है

और सीधे रात हो जाती है.
शायद वक्त सिमट रहा है..

जब मैं छोटा था,

शायद दोस्ती

बहुत गहरी हुआ करती थी,
दिन भर वो हुजूम बनाकर खेलना,

वो दोस्तों के घर का खाना,

वो लड़कियों की बातें,

वो साथ रोना...

अब भी मेरे कई दोस्त हैं,
पर दोस्ती जाने कहाँ है,

जब भी "traffic signal" पे मिलते हैं

"Hi" हो जाती है,

और अपने अपने रास्ते चल देते हैं,
होली, दीवाली, जन्मदिन,

नए साल पर बस SMS आ जाते हैं,
शायद अब रिश्ते बदल रहें हैं..

जब मैं छोटा था,
तब खेल भी अजीब हुआ करते थे,
छुपन छुपाई, लंगडी टांग,
पोषम पा, कट केक,
टिप्पी टीपी टाप.
अब internet, office,
से फुर्सत ही नहीं मिलती..
शायद ज़िन्दगी बदल रही है.


जिंदगी का सबसे बड़ा सच यही है..
जो अक्सर कबरिस्तान के बाहर
बोर्ड पर लिखा होता है...
"मंजिल तो यही थी,
बस जिंदगी गुज़र गयी मेरी
यहाँ आते आते"

ज़िंदगी का लम्हा बहुत छोटा सा है...
कल की कोई बुनियाद नहीं है
और आने वाला कल सिर्फ सपने में ही है..
अब बच गए इस पल में..
तमन्नाओं से भरी इस जिंदगी में
हम सिर्फ भाग रहे हैं..
कुछ रफ़्तार धीमी करो,
मेरे दोस्त,

और इस ज़िंदगी को जियो...
खूब जियो मेरे दोस्त,
और औरों को भी जीने दो...

Horoscope Test !!!


If you are honest this tells the truth - it's pretty good

Write your answers on a piece of paper. No cheating !!

The answers are at the bottom of this page.

1. Write the name of a person of the opposite sex.

2. Which is your favourite colour out of red, black, blue, green, yellow?

3. Your first initial?

4. Your month of birth?

5. Which colour do you like more, black or white?

6. Name of a person of the same sex as yours.

7. Your favourite number?

8. Do you like Shimla or Delhi more?

9. Do you like a lake or the ocean more?



When you're done, scroll down. (Don't cheat)

Answers

1. You are completely in love with this person.

2. If you choose:
Red - You are alert and your life is full of love.
Black - you are conservative and aggressive.
Green - your soul is relaxed and you are laid back
Blue - you are spontaneous and love kisses and affection from the ones you love.
Yellow- you are a very happy person and give good advice to those who are down.

3. If your initial is:
A-K: You have a lot of love to give in friendships in your life.
L-R: You try to enjoy your life to the maximum and your love life is soon to blossom.
S-Z: You like to help others and your future love life looks very good.

4. If you were born in:
Jan-Mar: The year will go very well for you and you will discover that you fall in love with someone totally unexpected.
April-June: You will have a strong love relationship that will last long and the memories will last forever.
July-Sep: You will have a great year and will experience a major life-changing experience for the good.
Oct-Dec: Your love life will not be too great, but eventually you will find your soul mate.

5. If you chose.....
Black: Your life will take on a different direction, it will be the best thing for you, and you will be glad for the change.

White: You will have a friend who completely confides in you and would do anything for you, but you may not realize it.

6. This person is your best friend.

7. This is how many close friends you have in your lifetime.

8. If you chose:
Shimla: You like adventure.
Delhi: You are a laid back person.

9. If you chose:
Lake: You are loyal to your friends and your lover and are very reserved.
Ocean: You are spontaneous and like to please people.

Live It !!!!

Take chances…! ..Tell the truth !.. learn to say NO.. 


Spend your money on the things you love.. 


Get to know sumone random…Say I love you to someone in life!!


 Feel the true love!! 


Tell the idiot how she hurts you….


Abuse sumone who deserves it… 


Sit alone, watch the rain and cry!!!


 Laugh till your stomach pains.. 


Dance even if you are too bad at it!!...


Pose stupidly for photos.. 


Give someone a hug when they need it & make sure you get one when you do!!


 Be naughty like child..




 LIVE IT, LOVE IT, ROCK IT!!



Because.. “life is just lived once"

अभिव्यक्ति !!!!



स्वयं को दूसरों के प्रति व्यक्त करना ही अभिव्यक्ति है. सामान्यतः हम इसे प्रतिक्रियात्मक रूप में ही अपनाते हैं. जीवों द्वारा अपनाया जाने वाला यह सशक्त माध्यम हमें प्रकृति प्रदत्त है एवं दिनचर्या में हम इसका प्रयोग अनिवार्य रूप से करते हैं.
इसके दो मूल रूप हैं, भावनात्मक एवं क्रियात्मक, और ये दोनों ही एक दूसरे के पूरक हैं. बिना क्रिया के, जो केवल इन्द्रियों द्वारा ही संभव है, भावना की अभिव्यक्ति नहीं हो सकती.
अभिव्यक्ति माध्यम के सन्दर्भ में प्रमुख हैं – दृष्टि , वाणी एवं स्पर्श. जब दृष्टि का प्रयोग अनुत्तरित होता है तो वाणी सहायक होती है एवं जब यह दोनों ही माध्यम अपूर्ण अथवा असफल होते हैं तो स्पर्श अपने तृतीय स्थान पर अपनी सशक्तता के साथ पूर्ण सहायक होता है. इन माध्यमों का प्रयोग विरल अथवा सामूहिक, परिस्थितिजन्य होता है.
दृष्टि की सफलता के लिए प्रथम यह आवश्यक है कि आपकी एवं सम्मुख कि दृष्टि एकाकार हो, द्वितीय, सम्मुख के लिए आपकी अभिव्यक्ति ग्राह्य हो. यदि यह ग्राह्य है तो भी सम्मुख व्यक्ति अपनी प्रतिक्रिया देने या न देने के लिए स्वतंत्र है, यह मानकर कि वह इसे समझ नहीं पाया.
वाणी मौखिक अथवा लिखित कि सार्थकता तभी है जब यह मातृ भाषा में हो ताकि सम्मुख उसकी मूल भावना को ग्रहण करे. कारण दो हैं. प्रथम, हम स्वयं अपनी मूल भावना के लिए उचित शब्दों का प्रयोग करें, द्वितीय सम्मुख शब्दों के शब्दार्थ एवं भावार्थ में विश्लेषण हेतु समर्थ हो. भले ही आपकी भावना किसी दूसरे द्वारा उल्लिखित अथवा उदधृत पंक्तिओं से हो परन्तु उसकी अभिव्यक्ति आपकी मौलिक वाणी में होनी चाहिए तभी वह प्रभावशाली होगी अन्यथा आपका प्रयास मात्र वाहक के रूप में ही परिलछित होगा.
स्पर्श, एक संपूर्ण, सशक्त, पूर्ण मौलिक, प्रभावशाली एवं सर्व ग्राह्य माध्यम है. इसमें दृष्टि अथवा वाणी निम्नस्तर पर प्रभावी अथवा मौन रहती है. यह माध्यम आत्म निर्भर है. जीवन में इसका प्रभाव प्रथम, सदैव एवं अंततः रहता है. संसार में आगम्नोपरांत नवजात को सर्वप्रथम जननी के वात्सल्य, बालपन में किसी बड़े की उंगली द्वारा सुरक्षा, बड़े होने पर सखा द्वारा हाथ में हाथ लेकर अत्म्यीयता, शोक संतप्त अथवा हर्षित के गले लगकर भावनाभिव्यक्ति किसी अन्य माध्यम द्वारा असंभव है. यदि यह संभव होता तो समाज में व्यक्तिगत रूप से निकटता की आवश्यकता नहीं होती. भावनाओं को मूल रूप से देय अथवा ग्राह्य केवल इसी माध्यम से ही किया जा सकता है. इसमें कपट अथवा शंका शून्य होती है तभी तो पशु पछी भी स्पर्श द्वारा हमारी भावनाओं को आसानी से समझ लेते हैं.
किसी भी माध्यम द्वारा अभिव्यक्ति दो परिस्थितिओं में कि जाती है, व्यक्तिगत अथवा सामूहिक.
सामूहिक अभिव्यक्ति में हार्दिक भावना गौण एवं मूल में बुद्धि कि व्यवहारिकता प्रधान होती है. यहाँ यह जान लेना आवश्यक है कि आपकी सामूहिक अभिव्यक्ति दूसरे के हृदय के प्रवेश द्वार तक ही पहुँचती है एवं इसका प्रभाव अस्थायी होता है.
व्यक्तिगत अभिव्यक्ति एक हृदय की भावना को दूसरे ह्रदय में चिरस्थायी करना होता है. इसका प्रभाव हृदयस्पंदन के साथ ही संसार से विदा लेता है.
अभिव्यक्ति रूप अथवा प्रयोग में जैसी भी हो मौन नहीं होनी चाहिए, विशेष कर सम्मुख के प्रति. आपकी मौन अभिव्यक्ति सदैव नकारात्मक प्रतिक्रिया का ही संकेत देगी एवं सम्मुख को उद्दंड, उद्दिगन अथवा हीन भावना से ग्रसित करेगी.
जब पशु पछी भी अपनी भावनाएँ व्यक्त करते हैं तो मानव होने के नाते आप स्वयं को अवश्य अभिव्यक्त करें क्योंकि यही आपकी निजता, व्यवहारिकता, मौलिकता, संवेदनशीलता एवं चेतना का प्रमाण है.
जड़ एवं शव अवश्य ही ऐसा न करने के लिए बाध्य हैं एवं इस हेतु किसी को उनसे कोई परिवाद भी नहीं है.
नामुराद

हे कृष्णा


हे कृष्णा तू इस घोर कलयुग में आ कर तो दिखा ,
तूने 18 साल की उम्र में मामा कंस को मारा ,
अफ़ज़ल या कसाब को हाथ लगा कर तो दिखा |
तूने अर्जुन को तो सारी गीता सुनायी ,
इलाके के विधायक से एक बार बात कर के तो दिखा |
तूने अर्जुन का सारथी बन के पाण्डवों को जिताया ,
भारतीय हाकी टीम का कोच बन के वर्ल्डकप जिता के तो दिखा |
तूने महाभारत में कौरवों को हराने में पाण्डवों की मदद की ,
देश में फैले भ्रष्टाचार तथा आतंक को पस्त करने में मदद कर के दिखा |
तूने भरी महफ़िल में द्रोपदी को साड़ी पहनाई,
मल्लिका शेरावत को एक जोड़ी कपडे ठीक से पहना कर तो दिखा |
तूने गोकुल की 1600 गोपियाँ पटाई,
इस देश के सिर्फ एक ईमानदार मंत्रीजी को पटा कर तो दिखा |
हे कृष्णा तू इस घोर कलयुग में आ कर तो दिखा ||
तुझे ये नाज़ कि ज़न्नत की भीख मांगूंगा,




मुझे ये जिद कि, तगादा मेरा उसूल नहीं.